निस्यंद (filtrate) के सांद्रण की क्रियाविधि को समझाइए।

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(N/A) मूत्र के सांद्रण की क्रियाविधि वृक्क (kidney) में होती है।
- स्तनधारियों और पक्षियों में सांद्र मूत्र उत्पन्न करने की क्षमता होती है; इसके लिए उन्होंने प्रतिधारा (counter-current) क्रियाविधि विकसित की है।
- हेनले का लूप (Henle's loop) और वासा रेक्टा (vasa recta) इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- हेनले के लूप की दो भुजाओं में निस्यंद का प्रवाह विपरीत दिशाओं में होता है,जिससे एक प्रतिधारा बनती है।
- वासा रेक्टा की दो भुजाओं में रक्त का प्रवाह भी प्रतिधारा पैटर्न में होता है।
- हेनले के लूप और वासा रेक्टा के बीच की निकटता,और उनमें मौजूद प्रतिधारा,आंतरिक मज्जा अंतरालीय (inner medullary interstitium) की ओर बढ़ती हुई परासरण सांद्रता (osmolarity) को बनाए रखने में मदद करती है,यानी कॉर्टेक्स में $300 \ mOsmol \ L^{-1}$ से लेकर आंतरिक मज्जा में लगभग $1200 \ mOsmol \ L^{-1}$ तक।
- यह प्रवणता मुख्य रूप से $NaCl$ और यूरिया के कारण होती है।
- $NaCl$ हेनले के लूप की आरोही भुजा द्वारा परिवहन किया जाता है,जो वासा रेक्टा की अवरोही भुजा के साथ विनिमय होता है।
- यूरिया की थोड़ी मात्रा हेनले के लूप की आरोही भुजा के पतले खंड में प्रवेश करती है,जिसे संग्रह नलिका (collecting tubule) द्वारा वापस अंतरालीय द्रव में पहुँचाया जाता है।
- हेनले के लूप और वासा रेक्टा की विशेष व्यवस्था द्वारा सुगम पदार्थों के ऐसे परिवहन को प्रतिधारा क्रियाविधि कहा जाता है।
- यह क्रियाविधि मज्जा अंतरालीय द्रव में सांद्रता प्रवणता बनाए रखने में मदद करती है।
- ऐसी अंतरालीय प्रवणता की उपस्थिति संग्रह नलिका से पानी के आसान मार्ग में मदद करती है,जिससे निस्यंद (मूत्र) सांद्र हो जाता है।
- मानव वृक्क प्रारंभिक निस्यंद की तुलना में लगभग चार गुना सांद्र मूत्र उत्पन्न कर सकते हैं।

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हेनले के लूप (Henle's loop) और वासा-रेक्टा (vasa-recta) के बीच की निकटता और उनमें मौजूद प्रतिधारा प्रवाह (counter-current) आंतरिक मज्जा अंतरालीय क्षेत्र (inner medullary interstitium) की ओर मोलरता में ...$A$... बनाए रखने में मदद करते हैं,यानी कॉर्टेक्स में ...$B$... $mOsmol \ L^{-1}$ से लेकर आंतरिक मज्जा में लगभग ...$C$... $mOsmol \ L^{-1}$ तक। यहाँ $A$,$B$ और $C$ क्या दर्शाते हैं?

$A :$ हेनले के लूप (loop of Henle) की अवरोही भुजा (descending limb) में मूत्र हाइपरटोनिक होता है,जबकि हेनले के लूप की आरोही भुजा (ascending limb) में मूत्र हाइपोटोनिक होता है।
$R :$ अवरोही भुजा $Na^+$ के लिए अपारगम्य है,जबकि आरोही भुजा $H_2O$ के लिए अपारगम्य है।

नेफ्रॉन में, सोडियम क्लोराइड और यूरिया जैसे पदार्थों का परिवहन एक विशेष व्यवस्था द्वारा सुगम होता है जिसे काउंटर-करंट मैकेनिज्म कहा जाता है, जो किससे मिलकर बना है?

$A$: स्तनधारी नेफ्रॉन की संग्राहक नलिका (collecting duct) के माध्यम से मूत्र से रक्त में पानी का अंतिम पुनरावशोषण होता है,जिसके परिणामस्वरूप अतिपरासारी (hyperosmotic) मूत्र का उत्पादन होता है।
$R$: हेनले का लूप (loop of Henle) स्तनधारी गुर्दे के मज्जा (medullary interstitium) की गहराई में सोडियम प्रवणता (sodium gradient) के निर्माण के लिए जिम्मेदार है।

मज्जा (medullary) अंतरालीय द्रव की उच्च ऑस्मोलैरिटी को बनाए रखने में निम्नलिखित में से कौन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है?

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