(N/A) बेंजीन का नाइट्रीकरण एक इलेक्ट्रॉनरागी एरोमैटिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया है। यह क्रियाविधि तीन मुख्य चरणों में होती है:
$1$. इलेक्ट्रॉनरागी का निर्माण: सांद्र $HNO_3$ और सांद्र $H_2SO_4$ के बीच अभिक्रिया से नाइट्रोनियम आयन $(NO_2^+)$ उत्पन्न होता है,जो इलेक्ट्रॉनरागी के रूप में कार्य करता है।
$HNO_3 + 2H_2SO_4 \rightarrow NO_2^+ + H_3O^+ + 2HSO_4^-$
$2$. कार्बधनायन मध्यवर्ती (एरेनियम आयन) का निर्माण: इलेक्ट्रॉनरागी $(NO_2^+)$ बेंजीन वलय पर आक्रमण करता है और अनुनाद-स्थायित्व प्राप्त कार्बधनायन बनाता है,जिसे सिग्मा संकुल या एरेनियम आयन कहा जाता है।
$3$. प्रोटॉन का निष्कासन: क्षार $(HSO_4^-)$ एरेनियम आयन के $sp^3$ संकरित कार्बन से एक प्रोटॉन को हटा देता है,जिससे वलय की एरोमैटिकता पुनः स्थापित हो जाती है और नाइट्रोबेंजीन का निर्माण होता है।