(N/A) प्रभाविता का नियम:
$(i)$ लक्षण 'कारकों' (factors) नामक असतत इकाइयों द्वारा नियंत्रित होते हैं।
$(ii)$ कारक जोड़ों में होते हैं।
$(iii)$ कारकों के एक असमान जोड़े में,एक सदस्य दूसरे पर प्रभावी (dominant) होता है,जबकि दूसरा अप्रभावी (recessive) होता है।
प्रभाविता का नियम एकसंकर संकरण में $F_1$ पीढ़ी में केवल एक पैतृक लक्षण की अभिव्यक्ति और $F_2$ पीढ़ी में दोनों की अभिव्यक्ति को समझाने के लिए उपयोग किया जाता है। यह $F_2$ पीढ़ी में प्राप्त $3:1$ के अनुपात को भी स्पष्ट करता है।
पृथक्करण का नियम:
यह नियम इस तथ्य पर आधारित है कि एलील (alleles) कोई मिश्रण नहीं दिखाते हैं और दोनों लक्षण $F_2$ पीढ़ी में पुनः प्राप्त हो जाते हैं,भले ही उनमें से एक $F_1$ चरण में दिखाई न दे।
यद्यपि जनकों में दो एलील होते हैं,युग्मक निर्माण के दौरान,एक जोड़े के कारक या एलील एक-दूसरे से अलग (segregate) हो जाते हैं ताकि एक युग्मक को दो कारकों में से केवल एक ही प्राप्त हो। एक समयुग्मजी जनक सभी समान युग्मक उत्पन्न करता है,जबकि एक विषमयुग्मजी जनक समान अनुपात में दो प्रकार के युग्मक उत्पन्न करता है।