(N/A) सोडियम हाइड्रॉक्साइड का व्यावसायिक उत्पादन कास्टनर-केलनर सेल में ब्राइन ($NaCl$ विलयन) के विद्युत अपघटन द्वारा किया जाता है। इसमें मरकरी कैथोड और कार्बन एनोड का उपयोग किया जाता है।
कैथोड पर,सोडियम आयनों का अपचयन होकर सोडियम धातु बनती है,जो मरकरी में घुलकर सोडियम अमलगम $(Na-Hg)$ बनाती है:
$Na^{+} + e^{-} \xrightarrow{Hg} Na-Hg$
एनोड पर,क्लोराइड आयनों का ऑक्सीकरण होकर क्लोरीन गैस मुक्त होती है:
$Cl^{-} \rightarrow \frac{1}{2} Cl_{2} + e^{-}$
इसके बाद सोडियम अमलगम की जल के साथ अभिक्रिया कराकर सोडियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन गैस प्राप्त की जाती है:
$2Na-Hg + 2H_{2}O \rightarrow 2NaOH + 2Hg + H_{2}$
गुण: सोडियम हाइड्रॉक्साइड एक सफेद,पारभासी ठोस है जिसका गलनांक $591 \ K$ है। यह जल में अत्यधिक घुलनशील है और एक प्रबल क्षारीय विलयन बनाता है। इसके क्रिस्टल प्रस्वेदी (deliquescent) होते हैं और वायुमंडलीय $CO_{2}$ के साथ अभिक्रिया करके $Na_{2}CO_{3}$ बनाते हैं।
उपयोग: $(i)$ साबुन,कागज और कृत्रिम रेशम के निर्माण में,$(ii)$ पेट्रोलियम शोधन में,$(iii)$ बॉक्साइट के शुद्धिकरण में,$(iv)$ सूती कपड़ों के मर्सराइजिंग में,$(v)$ शुद्ध वसा और तेलों की तैयारी में,और $(vi)$ प्रयोगशाला अभिकर्मक के रूप में।