सहसंयोजक बंधों में इलेक्ट्रॉन विस्थापन प्रभावों की व्याख्या कीजिए।

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(N/A) एक कार्बनिक अणु में इलेक्ट्रॉन विस्थापन या तो किसी परमाणु या प्रतिस्थापी समूह के प्रभाव में मूल अवस्था में हो सकता है या किसी उपयुक्त आक्रमणकारी अभिकर्मक की उपस्थिति में हो सकता है।
$(i)$ अणु में उपस्थित किसी परमाणु या प्रतिस्थापी समूह के प्रभाव के कारण होने वाला इलेक्ट्रॉन विस्थापन बंध का स्थायी ध्रुवीकरण करता है। प्रेरणिक प्रभाव (Inductive effect) और अनुनाद प्रभाव (Resonance effects) इस प्रकार के इलेक्ट्रॉन विस्थापन के उदाहरण हैं।
$(ii)$ जब कोई अभिकर्मक किसी अणु पर आक्रमण करने के लिए निकट आता है,तो अणु में अस्थायी इलेक्ट्रॉन विस्थापन प्रभाव देखे जाते हैं। इस प्रकार के इलेक्ट्रॉन विस्थापन को इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव (Electromeric effect) या ध्रुवणता प्रभाव (Polarisability effect) कहा जाता है।

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निम्नलिखित कथनों के लिए सत्य या असत्य बताइए:
$(i)$ कार्बोनियम आयन (carbocation) की स्थिरता को हाइपरकंजुगेशन की विस्थानीकृत संरचना द्वारा समझाया जाता है।
$(ii)$ कार्बोनियम आयन की स्थिरता को अनुनाद (resonance) संरचना बनाकर समझाया जाता है।
$(iii)$ हाइपरकंजुगेशन प्रभाव $(+)$ या $(-)$ होता है।
$(iv)$ मेसोमेरिक प्रभाव $(+)$ या $(-)$ होता है।

निम्नलिखित कार्बोनियम आयनों (carbocations) की स्थिरता का सही क्रम निर्धारित करें:

आकृति द्वारा $CH_3-CH_2^+$ और $CH_3-CH=CH_2$ में अतिसंयुग्मन (hyperconjugation) को दर्शाइए।

प्रेरक प्रभाव (Inductive effect),अनुनाद (Resonance) और इलेक्ट्रोमेरिक प्रभावों से किस प्रकार भिन्न है?

निम्नलिखित के लिए हाइपरकंजुगेशन अनुनाद संरचनाएं बनाएं:
$(a) \ CH_3-CH=CH_2$
$(b) \ CH_3-CH_2^+$
$(c) \ CH_3-CH_2-CH_2^+$

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