(N/A) द्विध्रुव-प्रेरित द्विध्रुव बल वे आकर्षण बल हैं जो एक ध्रुवीय अणु (जिसमें स्थायी द्विध्रुव होता है) और एक अध्रुवीय अणु के बीच उत्पन्न होते हैं।
जब एक ध्रुवीय अणु एक अध्रुवीय अणु के करीब आता है,तो ध्रुवीय अणु का विद्युत क्षेत्र अध्रुवीय अणु के इलेक्ट्रॉन बादल को विकृत कर देता है।
यह विकृति अध्रुवीय अणु में आवेश का अस्थायी पृथक्करण पैदा करती है,जिससे एक प्रेरित द्विध्रुव बनता है।
ध्रुवीय अणु के स्थायी द्विध्रुव और अध्रुवीय अणु के प्रेरित द्विध्रुव के बीच की परस्पर क्रिया के परिणामस्वरूप जो आकर्षण बल उत्पन्न होता है,उसे द्विध्रुव-प्रेरित द्विध्रुव बल कहा जाता है।
इस परस्पर क्रिया की प्रबलता ध्रुवीय अणु के द्विध्रुव आघूर्ण और अध्रुवीय अणु की ध्रुवणता पर निर्भर करती है।