(N/A) द्विध्रुव-द्विध्रुव बल उन अणुओं के बीच कार्य करते हैं जिनमें स्थायी द्विध्रुव होता है। उदाहरण के लिए,$HCl$,$HF$,$CO$,$NO$ और $NH_{3}$ द्विध्रुव-द्विध्रुव बल प्रदर्शित करते हैं।
द्विध्रुव के सिरों पर आंशिक आवेश होते हैं,जिन्हें ग्रीक अक्षर डेल्टा $(\delta)$ द्वारा दर्शाया जाता है। ये आंशिक आवेश हमेशा इकाई इलेक्ट्रॉनिक आवेश $(1.6 \times 10^{-19} \ C)$ से कम होते हैं।
द्विध्रुव-द्विध्रुव बलों का निर्माण: पड़ोसी ध्रुवीय अणु एक-दूसरे के साथ परस्पर क्रिया करते हैं। चित्र $(a)$ हाइड्रोजन क्लोराइड द्विध्रुव में इलेक्ट्रॉन क्लाउड वितरण को दर्शाता है और चित्र $(b)$ दो $HCl$ अणुओं के बीच द्विध्रुव-द्विध्रुव परस्पर क्रिया को दर्शाता है।
विशेषताएं:
- यह परस्पर क्रिया लंदन परिक्षेपण बलों (London dispersion forces) से मजबूत होती है लेकिन आयन-आयन परस्पर क्रिया से कमजोर होती है क्योंकि इसमें केवल आंशिक आवेश शामिल होते हैं।
- द्विध्रुवों के बीच की दूरी बढ़ने पर आकर्षण बल कम हो जाता है।
- परस्पर क्रिया ऊर्जा ध्रुवीय अणुओं के बीच की दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
- स्थिर ध्रुवीय अणुओं (जैसे ठोसों में) के बीच द्विध्रुव-द्विध्रुव परस्पर क्रिया ऊर्जा $1/r^{3}$ के समानुपाती होती है और घूर्णन करने वाले ध्रुवीय अणुओं के बीच यह $1/r^{6}$ के समानुपाती होती है,जहाँ $r$ ध्रुवीय अणुओं के बीच की दूरी है।