(N/A) हाँ,पौधों में वृद्धि का प्रतिरूप जंतुओं से भिन्न होता है।
पादप वृद्धि अद्वितीय है क्योंकि पौधे अपने पूरे जीवनकाल में असीमित वृद्धि की क्षमता बनाए रखते हैं।
यह क्षमता उनके शरीर में कुछ निश्चित स्थानों पर मौजूद विभज्योतक (meristems) के कारण होती है।
ऐसे विभज्योतकों की कोशिकाओं में विभाजित होने और स्वयं को बनाए रखने की क्षमता होती है।
इन विभाजनों के उत्पाद जल्द ही विभाजित होने की क्षमता खो देते हैं और विभेदित होकर पादप शरीर का निर्माण करते हैं।
वृद्धि का यह रूप,जिसमें विभज्योतक की गतिविधि द्वारा पादप शरीर में हमेशा नई कोशिकाएं जुड़ती रहती हैं,उसे वृद्धि का खुला रूप (open form of growth) कहा जाता है।
इसके विपरीत,जंतुओं में वृद्धि निश्चित होती है,जिसका अर्थ है कि उनके पास एक सीमित वृद्धि अवधि होती है जिसके बाद उनके शरीर की आगे की वृद्धि रुक जाती है।
पौधों के जो क्षेत्र अनिश्चित काल तक वृद्धि कर सकते हैं,वे विभज्योतक क्षेत्र हैं,जैसे कि मूल शीर्ष विभज्योतक (root apical meristem) और प्ररोह शीर्ष विभज्योतक (shoot apical meristem)।