(N/A) हाइड्रोजन आवर्त सारणी का पहला तत्व है। इसके विशिष्ट गुणों के कारण इसका स्थान चर्चा का विषय रहा है।
$1$. क्षार धातुओं के साथ समानता: हाइड्रोजन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $1s^1$ है, जो क्षार धातुओं (समूह $1$) के बाहरी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $(ns^1)$ के समान है। क्षार धातुओं की तरह, यह एक-धनावेशित आयन $(H^+)$ बनाता है और ऑक्साइड, हैलाइड और सल्फाइड बनाता है।
$2$. हैलोजन के साथ समानता: हैलोजन (समूह $17$) की तरह, हाइड्रोजन को निकटतम उत्कृष्ट गैस विन्यास प्राप्त करने के लिए एक इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है। यह द्विपरमाणुक अणु $(H_2)$ बनाता है और सहसंयोजक यौगिक बनाता है।
$3$. अंतर: क्षार धातुओं के विपरीत, हाइड्रोजन की आयनन एन्थैल्पी बहुत अधिक $(1312 \text{ kJ mol}^{-1})$ होती है और इसमें धात्विक गुण नहीं होते हैं। हैलोजन की तुलना में इसकी अभिक्रियाशीलता बहुत कम है।
$4$. विशिष्ट स्वभाव: हाइड्रोजन परमाणु से इलेक्ट्रॉन निकलने पर एक नाभिक $(H^+)$ बनता है जिसका आकार $\sim 1.5 \times 10^{-3} \text{ pm}$ होता है, जो सामान्य परमाणु/आयनिक आकारों ($50$ से $200 \text{ pm}$) की तुलना में अत्यंत छोटा है। परिणामस्वरूप, $H^+$ स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में नहीं रहता है।
निष्कर्ष: इन विशिष्ट गुणों के कारण, हाइड्रोजन को आवर्त सारणी में अलग रखना सबसे उपयुक्त है।