(N/A) पृथ्वी पर जीवन का उदय इसके निर्माण के $500$ मिलियन वर्ष बाद,लगभग $4$ अरब वर्ष पहले हुआ था।
पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति को समझाने के लिए विभिन्न विचारकों और वैज्ञानिकों द्वारा अलग-अलग सिद्धांत दिए गए थे:
$(i)$ विशेष सृष्टि का सिद्धांत (Theory of Special Creation): यह बताता है कि ईश्वर ने जीवन का निर्माण अपने दिव्य कार्य द्वारा किया है; अर्थात पृथ्वी,प्रकाश,पौधे और जानवर सभी एक अलौकिक शक्ति द्वारा बनाए गए हैं।
इस सिद्धांत के तीन मुख्य बिंदु हैं: $(a)$ आज हम जो भी जीव या प्रजातियां देखते हैं,उन्हें वैसे ही बनाया गया था। $(b)$ सृष्टि के समय से ही विविधता समान रही है और भविष्य में भी समान रहेगी। $(c)$ पृथ्वी लगभग $4000$ वर्ष पुरानी है।
$(ii)$ पैंसपर्मिया का सिद्धांत (Theory of Panspermia): यह प्रारंभिक ग्रीक विचारकों द्वारा दिया गया था,जो बताता है कि पृथ्वी पर जीवन बीजाणुओं (spores) या पैंसपर्मिया से उत्पन्न हुआ,जो बाहरी अंतरिक्ष से आए थे और जीवित रूपों में विकसित हुए।
$(iii)$ स्वतः जनन का सिद्धांत (Theory of Spontaneous Generation): यह बताता है कि जीवन निर्जीव पदार्थों से स्वतः उत्पन्न हुआ है। इस सिद्धांत को 'एबायोजेनेसिस' (abiogenesis) के रूप में भी जाना जाता है। लंबे समय तक यह माना जाता था कि जीवन सड़ने वाले पदार्थों जैसे घास,कीचड़ आदि से उत्पन्न होता है। लुई पाश्चर ( $1860$ में) ने इस सिद्धांत को खारिज कर दिया और प्रदर्शित किया कि जीवन पहले से मौजूद जीवन से ही आता है। अपने प्रयोग में,उन्होंने मृत यीस्ट कोशिकाओं को एक पूर्व-कीटाणुरहित फ्लास्क में और दूसरे फ्लास्क को खुली हवा में रखा। पहले फ्लास्क में जीवन विकसित नहीं हुआ,लेकिन दूसरे फ्लास्क में नए जीव विकसित हुए।
$(iv)$ रासायनिक विकास का सिद्धांत (Theory of Chemical Evolution): यह सिद्धांत ओपेरिन और हाल्डेन द्वारा दिया गया था। उनके अनुसार,जीवन का पहला रूप पहले से मौजूद,निर्जीव कार्बनिक अणुओं (जैसे $RNA$,प्रोटीन आदि) से आया था और रासायनिक विकास के बाद जीवन का निर्माण हुआ,यानी अकार्बनिक घटकों से विभिन्न कार्बनिक अणुओं का निर्माण हुआ। पृथ्वी पर रासायनिक विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियों में उच्च तापमान,ज्वालामुखी तूफान और $CH_4$,$NH_3$ आदि युक्त अपचायक (reducing) वातावरण शामिल था।