(N/A) हृदय चक्र हृदय में होने वाली उन क्रमिक घटनाओं का समूह है जो चक्रीय रूप से दोहराई जाती हैं। इसमें निम्नलिखित चरण शामिल हैं:
$1$. आलिंद संकुचन (Atrial Systole): $SA$ नोड एक क्रियात्मक विभव उत्पन्न करता है,जो दोनों आलिंदों को एक साथ संकुचित होने के लिए उत्तेजित करता है। इससे निलयों में रक्त का प्रवाह लगभग $30\%$ बढ़ जाता है।
$2$. निलय संकुचन (Ventricular Systole): क्रियात्मक विभव $AV$ नोड और बंडल ऑफ हिस के माध्यम से निलयों तक पहुँचता है,जिससे निलय संकुचित होते हैं। इसके परिणामस्वरूप $AV$ वाल्व बंद हो जाते हैं (पहली हृदय ध्वनि '$lub$' उत्पन्न होती है) और अर्धचंद्राकार वाल्व खुल जाते हैं,जिससे रक्त महाधमनी और फुफ्फुसीय धमनी में चला जाता है।
$3$. संयुक्त अनुशिथिलन (Joint Diastole): आलिंद और निलय दोनों शिथिल अवस्था में होते हैं। अर्धचंद्राकार वाल्व बंद हो जाते हैं (दूसरी हृदय ध्वनि '$dub$' उत्पन्न होती है),और $AV$ वाल्व खुल जाते हैं,जिससे रक्त आलिंदों से निलयों में प्रवाहित होता है।
द्वि-परिसंचरण का अर्थ है वह मार्ग जिसमें रक्त एक पूर्ण चक्र में हृदय से दो बार गुजरता है:
$1$. फुफ्फुसीय परिसंचरण (Pulmonary Circulation): अशुद्ध रक्त को दाएं निलय से फेफड़ों में ऑक्सीजनीकरण के लिए पंप किया जाता है और वहां से बाएं आलिंद में वापस लाया जाता है।
$2$. दैहिक परिसंचरण (Systemic Circulation): ऑक्सीजनयुक्त रक्त को बाएं निलय से शरीर के सभी ऊतकों में पंप किया जाता है और अशुद्ध रक्त के रूप में दाएं आलिंद में वापस लाया जाता है।