(N/A) सिद्धांत: साधारण आसवन का उपयोग उन द्रवों को शुद्ध करने के लिए किया जाता है जो बिना अपघटन के उबलते हैं और जिनके क्वथनांक में पर्याप्त अंतर होता है।
$(B)$ प्रक्रिया: द्रव मिश्रण को एक गोल पेंदी वाले फ्लास्क में लिया जाता है। फ्लास्क को एक थर्मामीटर,एक कंडेनसर और पानी के इनलेट/आउटलेट के साथ फिट किया जाता है। आसुत (distillate) को इकट्ठा करने के लिए कंडेनसर के खुले सिरे पर एक शंक्वाकार (conical) फ्लास्क रखा जाता है।
मिश्रण को सावधानीपूर्वक गर्म किया जाता है। कम क्वथनांक वाला घटक पहले वाष्पित होता है। ये वाष्प कंडेनसर से गुजरती हैं,जहाँ उन्हें बहते हुए ठंडे पानी द्वारा ठंडा किया जाता है,और वे वापस शुद्ध द्रव में संघनित हो जाती हैं,जिसे रिसीवर (शंक्वाकार फ्लास्क) में एकत्र किया जाता है।
$(C)$ उदाहरण: क्लोरोफॉर्म (क्वथनांक $334 \ K$) और एनिलिन (क्वथनांक $457 \ K$) के मिश्रण को इस तकनीक द्वारा आसानी से अलग किया जा सकता है।