(N/A) मधुमक्खियों में लिंग निर्धारण इस बात पर आधारित है कि एक जीव को गुणसूत्रों के कितने सेट प्राप्त होते हैं।
शुक्राणु और अंडे के मिलन से बनी संतान मादा (रानी या श्रमिक) के रूप में विकसित होती है,और एक अनिषेचित अंडा अनिषेकजनन (parthenogenesis) के माध्यम से नर (ड्रोन) के रूप में विकसित होता है। इसका मतलब है कि नर में मादा की तुलना में आधे गुणसूत्र होते हैं।
मादाएं द्विगुणित (diploid) होती हैं जिनमें $32$ गुणसूत्र होते हैं और नर अगुणित (haploid) होते हैं,यानी उनमें $16$ गुणसूत्र होते हैं। इसे हेप्लो-डिप्लोइड लिंग निर्धारण प्रणाली कहा जाता है। इसकी विशेष विशेषताएं हैं,जैसे: नर समसूत्री विभाजन (mitosis) द्वारा शुक्राणु उत्पन्न करते हैं,उनके पिता नहीं होते हैं और इसलिए उनके बेटे नहीं हो सकते हैं,लेकिन उनके दादा होते हैं और उनके पोते हो सकते हैं।