(N/A) हाँ,यह समूहीकरण उचित है क्योंकि साइनोबैक्टीरिया और परपोषी बैक्टीरिया दोनों प्रोकैरियोटिक जीव हैं।
$1$. दोनों में सुस्पष्ट केंद्रक और झिल्ली-बद्ध कोशिकांगों का अभाव होता है।
$2$. दोनों में पेप्टिडोग्लाइकन (म्यूरीन) से बनी कठोर कोशिका भित्ति होती है।
$3$. दोनों में $70S$ राइबोसोम पाए जाते हैं।
$4$. साइनोबैक्टीरिया प्रकाश संश्लेषी स्वपोषी होते हैं जिनमें क्लोरोफिल $a$ होता है (हरे पौधों के समान),जबकि परपोषी बैक्टीरिया कार्बनिक पदार्थों से पोषण प्राप्त करते हैं।
$5$. उनकी चयापचय संबंधी भिन्नताओं के बावजूद,उनका मौलिक कोशिकीय संगठन (प्रोकैरियोटिक प्रकृति) समान है,जो 'पाँच जगत वर्गीकरण' के तहत उन्हें जगत-मोनेरा में रखने का मुख्य मानदंड है।