(N/A) $\Rightarrow$ नाइट्रीकारी बैक्टीरिया रसायनस्वपोषी $(Chemoautotrophs)$ होते हैं।
$\Rightarrow$ वे अमोनिया $(NH_3)$ या नाइट्राइट $(NO_2^-)$ जैसे अकार्बनिक पदार्थों का ऑक्सीकरण करके नाइट्रेट $(NO_3^-)$ में बदलकर ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
$\Rightarrow$ इस ऊर्जा का उपयोग कार्बन डाइऑक्साइड $(CO_2)$ को कार्बनिक यौगिकों में स्थिर करने के लिए किया जाता है।
$\Rightarrow$ इस प्रकार निर्मित नाइट्रेट पौधों द्वारा अवशोषित किया जाता है और पत्तियों तक पहुँचाया जाता है।
$\Rightarrow$ पत्तियों में इसका अपचयन (reduction) होकर अमोनिया बनता है,जिसे बाद में अमीनो एसिड में शामिल कर लिया जाता है।
$\Rightarrow$ प्रक्रिया का मार्ग: $\text{नाइट्रेट} \rightarrow \text{पत्तियाँ} \xrightarrow{\text{अपचयन}} \text{अमोनिया} \rightarrow \text{अमीनो एसिड}$.