(N/A) खेतों में फसल सुरक्षा: खेत की फसलों को बड़ी संख्या में खरपतवार, कीटों और रोगों से नुकसान होता है। यदि इन्हें उचित समय पर नियंत्रित नहीं किया जाता है, तो ये फसलों को बहुत अधिक नुकसान पहुँचा सकते हैं। विधियाँ:
$(i)$ कीटनाशकों का उपयोग: इसमें शाकनाशी, कीटनाशक और कवकनाशी शामिल हैं जिनका छिड़काव पौधों पर या बीज और मिट्टी के उपचार के लिए किया जाता है।
$(ii)$ खरपतवार नियंत्रण: खरपतवारों को यांत्रिक रूप से हटाना।
$(iii)$ निवारक विधियाँ: उचित बीज क्यारी तैयार करना, समय पर बुवाई, अंतःफसल और फसल चक्र। प्रतिरोधी किस्मों का उपयोग और गर्मियों में गहरी जुताई करने से कीटों और खरपतवारों का नाश होता है।
$(B)$ भंडारण में फसल सुरक्षा:
भंडारित अनाज को प्रभावित करने वाले कारक:
$(i)$ जैविक कारक: कीट, कृंतक (चूहे), कवक, घुन और बैक्टीरिया।
$(ii)$ अजैविक कारक: नमी की मात्रा, आर्द्रता और तापमान। ये कारक गुणवत्ता में गिरावट, वजन में कमी, रंग में बदलाव और अंकुरण क्षमता में कमी का कारण बनते हैं।
नियंत्रण के उपाय:
$(a)$ भंडारण से पहले उपज की सख्त सफाई।
$(b)$ उपज को पहले धूप में और फिर छाया में ठीक से सुखाना।
$(c)$ कीटों को मारने के लिए धूमीकरण (फ्यूमिगेशन)।
$(d)$ गोदामों की सफाई और जैविक कारकों की निगरानी।
$(e)$ भंडारण में नमी और तापमान का उचित नियंत्रण।